"श्री श्री चैतन्य चरितामृत" एक महान भक्तिपंथी ग्रंथ है, जो गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के संस्थापक श्री चैतन्य महाप्रभु के जीवन, उनके उपदेशों और उनकी दिव्य लीलाओं का विस्तृत वर्णन करता है। यह ग्रंथ श्री कृष्ण के अवतार श्री चैतन्य महाप्रभु की भक्ति और उनके द्वारा फैलाए गए "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे" के महामंत्र का महत्व उजागर करता है।"श्री श्री चैतन्य चरितामृत" को श्री कृष्णदास कवीराज गोस्वामी ने रचित किया है। यह ग्रंथ संस्कृत और बांग्ला में लिखा गया है, और इसे श्री चैतन्य महाप्रभु के जीवन के बारे में सबसे महत्वपूर्ण और प्रामाणिक ग्रंथों में से एक माना जाता है। इसमें महाप्रभु की जन्मकथा, उनके भक्तों के साथ उनके संवाद, उनके द्वारा किए गए चमत्कारी कार्य, और उनके द्वारा स्थापित धार्मिक सिद्धांतों का सुंदर रूप से वर्णन किया गया है।
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