"श्री वृंदावन शतक" एक महत्वपूर्ण भक्तिमार्गी संस्कृत ग्रंथ है, जो वृंदावन के पवित्र स्थल की महिमा और दिव्यता का गान करता है। यह ग्रंथ 100 श्लोकों (शतक) का संग्रह है, जिसमें लेखक या काव्यकार वृंदावन की महानता, वहां के दिव्य लीलाओं और भगवान श्री कृष्ण के अनंत प्रेम को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करता है।वृंदावन वह पवित्र भूमि है जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने अपने बचपन में अनेक दिव्य लीलाएं की थीं, और यह स्थल कृष्ण भक्तों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस ग्रंथ में वृंदावन के रमणीय वातावरण, वहां के विशेष स्थानों और भगवान श्री कृष्ण के अद्वितीय स्वरूप का वर्णन किया गया है।"श्री वृंदावन शतक" विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो श्री कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम को गहराई से महसूस करना चाहते हैं। यह पुस्तक भक्तों को श्री कृष्ण के साथ अपनी आत्मिक संबंध को और प्रगाढ़ बनाने के लिए प्रेरित करती है। इसके श्लोकों में वृंदावन के विभिन्न पहलुओं, जैसे वहां के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व और कृष्ण के साथ श्रद्धा की भावना को व्यक्त किया गया है।
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